Showing posts with label अरुण जेटली. Show all posts
Showing posts with label अरुण जेटली. Show all posts

Saturday, 28 February 2015

बजट के इरादे तो अच्छे हैं, लेकिन कोई रोडमैप नहींः मनमोहन

पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा है कि बजट के इरादे तो अच्छे हैं, लेकिन कोई रोडमैप नहीं है। उन्होंने राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) सरकार के वित्तमंत्री अरुण जेटली द्वारा शनिवार को पेश किए गए 2015-16 के बजट को निराशाजनक बताया।

उनके मुताबिक, 1991 से देश की अर्थव्यवस्था (मनमोहन सिंह) के दिखाए रास्ते पर चल रही है। अरुण जेटली भी उसी राह पर चल रहे हैं।

नरसिंह राव सरकार में वित्त मंत्री के तौर पर 1991 में आर्थिक सुधारों का मार्ग प्रशस्त करने वाले मनमोहन ने कहा कि यह बजट राजग सरकार के अच्छे इरादों को जाहिर करता है, लेकिन इसमें उद्देश्यों को हासिल करने के लिए किसी स्पष्ट योजना का अभाव है। बजट को निराशाजनक बताते हुए मनमोहन ने कहा कि मोदी सरकार ने बजट में बहुत सी घोषणाएं की हैं, लेकिन उन्हें लागू करने की कोई तरकीब नहीं बताई है।

उन्होंने कहा कि बहुत से कोष स्थापित किए गए, लेकिन उन्हें ठोस कार्य योजना में बदलने के लिए कोई स्पष्ट निर्देश नहीं है। पूर्व प्रधानमंत्री ने देश के ग्रामीण इलाकों में रहने वालों व गरीब लोगों के लिए कल्याणकारी योजनाआें के लिए अपर्याप्त धन आवंटन को लेकर भी सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि देश के 70 प्रतिशत लोग ग्रामीण इलाकों में रहते हैं, उन पर ज्यादा ध्यान नहीं दिया गया।

 

लघु उद्योगों को मिलेगा आसान ऋण, एस/एसटी को मिलेगी प्राथमिकता

वित्तमंत्री अरुण जेटली ने आज वर्ष 2015-16 के लिए बजट पेश किया। इसमें छोटे उद्यमियों के लिए सूक्ष्म यूनिट विकास पुनर्वित एजेंसी (मुद्रा) का सृजनऋण देने में अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति के उद्यमियों को प्राथमिकता दी है। अपने बजट भाषण में उन्होंने कहा कि सरकार का विश्वास है कि विकास से समावेशी विकास होगा। जहां एक ओर बड़े कारपोरेट और कारोबारी कंपनियों को इसमें भूमिका निभानी है, वहीं दूसरी ओर इसे अधिकतम रोजगार सृजन में लगे अनौपचारिक क्षेत्र के उद्यमों द्वारा संपूरित करना होगा।

जेटली ने कहा कि लगभग 5.77 करोड़ छोटे व्यवसाय वाली इकाइयां हैं, इनमें से अधिकतर वैयक्तिक स्वामित्व की हैं, जो छोटे विनिर्माण, व्यापार अथवा सेवा व्यवसाय चलाती हैं और इनमें 62 प्रतिशत अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति/ अन्य पिछड़े वर्ग के व्यक्तियों के स्वामित्व में हैं। ये मेहनतकश उद्यमी पिरामिड के सबसे निचले पायदान पर हैं और उनके लिए ऋण की औपचारिक प्रणालियों तक पहुंच बनाना असंभव नहीं लेकिन मुश्किल अवश्य है।

 

घरेलू विनिर्माण और ‘मेक इन इंडिया’ के जरिए रोजगार बढ़ाएगी सरकार

बड़ी संख्या में रोजगारों के सृजन हेतु घरेलू विनिर्माण एवं ‘मेक इन इंडिया’ को प्रोत्साहन देने के लिए केन्द्रीय वित्त मंत्री श्री अरुण जेटली ने आज संसद में पेश आम बजट 2015-16 में सीमा शुल्क एवं उत्पाद शुल्क में अनेक रियायतों की घोषणा की। कुछ खास कच्चे माल जैसे धातु पुर्जे, इन्सुलेटेड वायर एवं केबल, रेफ्रिजरेटर कम्प्रेशर के कलपुर्जों, वीडियो कैमरा के कंपाउंड्स इत्यादि पर सीमा शुल्क घटा दिया गया है।

इसी तरह लेथ मशीनों में इस्तेमाल होने वाले कुछ खास कच्चे माल पर देय बुनियादी सीमा शुल्क को 7.5 फीसदी से घटाकर 2.5 फीसदी और एलसीडी/एलईडी टीवी पैनलों पर बुनियादी सीमा शुल्क को 10 फीसदी से घटाकर शून्य किया जा रहा है। पेसमेकर के निर्माण में इस्तेमाल होने वाले विशेष कच्चे माल पर सीवीडी और एसएडी से पूरी तरह छूट दी जा रही है।

 

काले धन को रोकने के लिए प्रतिबद्ध है सरकारः वित्त मंत्री

वित्त मंत्री अरुण जेटली ने बजट प्रस्तुत करते हुए कहा कि सरकार काले धन को रोकने के लिए प्रतिबद्ध है और इस दिशा में कई महत्वपूर्ण कदम उठाए जाएंगे।

वित्त मंत्री ने कहा कि युवाओं के लिए रोजगार सृजन पर सरकार को जोर होगा। साथ ही कर नीति में बदलाव किया जाएगा। फिलहाल जो कर नीति है वह दुनिया के स्तर पर ज्यादा है, लेकिन वास्तविक कर वसूली बहुत कम हो पाती है। इसलिए सरकार ऐसे उपाय लागू करेगी जिससे कर संग्रह बढ़े और कर की दरों में कटौती होगी।

सरकार जीएसटी लागू करने के लिए प्रतिबद्ध है, लेकिन इसके लिए संविधान संशोधन की जरुरत पड़ेगी। सरकार इस दिशा में कदम बढ़ाने के लिए जल्द ही संविधान संशोधन लाएगी। वित्त मंत्री के मुताबिक जीएसटी लागू होने से वस्तु और सेवाओं की लागत में कमी आएगी, इससे बाजार को फायदा होगा।

वित्त मंत्री ने कहा कि कारपोरेट दर 30 फीसदी है जो ज्यादा है। साथ ही सरकार केवल 23 फीसदी कर ही वसूल कर पाती है। दूसरी तरफ कारपोरेट सेक्टर को प्रोत्साहन के लिए अत्यधिक कर छूट दी जा रही है। इसलिए सरकार का लक्ष्य है अगले चार वर्षों में कारपोरेट करों की दर को 30 फीसदी से घटाकर 25 फीसदी कर दी जाए। जबकि उनको जो करों में छूट और प्रोत्साहन दिया जा रहा है, उसे युक्तिसंगत बनाया जाएगा। अगर सरकार कारपोरेट सेक्टर को दिए जा रहे छूट में कोई कटौती करेगी तो उन्हें इस बारे में अग्रिम जानकारी दी जाएगी।

 

आम बजट 2015ः रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता पर जोर, 2,86,727 करोड़ आवंटन

मोदी सरकार के पहले पूर्ण बजट में रक्षा क्षेत्र पर विशेष ध्यान दिया गया है। जैसी की पहले ही संभावना थी कि रक्षा बजट के आवंटन में अच्छी खासी बढ़ोतरी की जाएगी। भारतीय सेना इस समय आधुनिकीकरण के दौर से गुजर रही है। इसके लिए बजट में काफी बढ़ोत्तरी किए जाने की जरूरत थी। बजट में रक्षा क्षेत्र के लिए 2,86, 727 करोड़ रुपये का आवंटन किया गया है।

वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा कि देश की रक्षा सबसे महत्वपूर्ण है। रक्षा बजट में इस बार आत्मनिर्भरता पर जोर दिया गया है। स्वदेशी क्षेत्र में निर्णाण के लिए आवंटन में प्राथमिकता दी गई है।

वर्ष 2013-14 के बजट में रक्षा क्षेत्र के लिए 2,03, 672 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया था जबकि अगले बजट में इसमें 12 फीसद की बढ़ोत्तरी की गई थी। 2014-15 में पेश बजट में इसे बढ़ाकर 2,24,000 करोड़ रुपये कर दिया गया था।

 

बजट 2015: जेटली ने इनकम टैक्‍स स्‍लैब में नहीं किया बदलाव

वित्त मंत्री अरुण जेटली ने इनकम टैक्स में कोई बदलाव नहीं किया है, मौजूदा टैक्स छूट बरकरार रहेगी। कॉर्पोरेट टैक्स 30 प्रतिशत से कम करके 25 प्रतिशत करने का प्रस्ताव रखा गया है। हालांकि वित्त मंत्री ने अमीरों की जेब ढीली करने की योजना बनाई है। जिनकी आमदनी एक करोड़ से ऊपर है, उन पर 2 प्रतिशत अतिरिक्त कर लगाया गया है। अब एक लाख रुपये से ऊपर की खरीद पर पैन नंबर भी जरूरी कर दिया गया हे।

काला धन संबंधी सूचना छिपाने पर 10 साल तक की जेल हो सकती है। टैक्स चोरों के लिए 10 साल की कड़ी सजा। घरेलू काला धन पर रोक के लिए बेनामी लेन-देन (निषेध) विधेयक होगा। सरचार्ज को 10 फीसदी से बढ़ाकर 12 फीसदी किया गया है। सर्विस टैक्स 12.36 प्रतिशत से बढ़ाकर 14 प्रतिशत कर दिया गया है।

भारत के पहले वित्त मंत्री आर. के शनमुखम चेट्टी ने 26 नवंबर 1947 को स्वतंत्र भारत का पहला बजट पेश किया था। तब से अब तक जब भी आम बजट पेश होता है, तो आम लोगों की नजर सबसे ज्यादा इनकम टैक्स स्लैब पर टिकी होती हैं। लोग जानना चाहते हैं कि वित्त मंत्री ने इनकम टैक्स में कुछ छूट दी या नहीं। लेकिन इस बार वित्त मंत्री ने मध्यमवर्गीय कर दाताओं को निराश किया है।

 

इन्फ्रास्ट्रक्चर सेक्टर में 70 हजार करोड़ तक का निवेश

सरकार ने वर्ष 2015-16 के आम बजट में देश की बढ़त के लिए उद्योगों के साथ-साथ शहरी एवं ग्रामीण विकास की जरूरत पर बल दिया है। वित्त मंत्री अरुण जेटली ने आम बजट पेश करते हुए साफ किया कि इन्फ्रास्ट्रक्चर डिवेलपमेंट सरकार की प्राथमिकता है, लिहाजा इन्फ्रास्ट्रक्चर सेक्टर को मजबूत बनाया जाएगा।

जेटली ने बजट की शुरूआत में ही ‘मेक इन प्रोग्राम’ को नई दिशा देने की बात कहते हुए कहा कि सरकार की पांच मुख्य चुनौतियों में ‘निर्माण क्षेत्र’ में निवेश को बढ़ाया जाना भी है। ऐसे में निवेश की स्थिति को मजबूत बनाना सरकार की प्राथमिकता है। उन्होंने आगे कहा, दुनिया भर में छाए मंदी के माहौल के बीच भारत की अर्थव्यवस्था तेजी से बढ़ने को तैयार है। लिहाजा, शहरी क्षेत्रों के साथ गांव में गरीबों तक विकास पहुंचाना सरकार का लक्ष्य है। उन्होंने औद्योगिक विकास को आगे बढ़ाना भी सरकार का लक्ष्य बताया।

 

बजट 2015: आयकर छूट में कोई बदलाव नहीं, सर्विस टैक्‍स बढ़ा

वित्त मंत्री अरुण जेटली वित्तीय वर्ष 2015-16 का आम बजट लोकसभा में पेश किया। वित्त मंत्री ने अपने बजट भाषण में आर्थिक स्थिति पर संतोष प्रकट करते हुए कहा कि देश का जीडीपी 7.4 फीसद रहने का अनुमान है। उन्हाेंने राजकोषीय घाटा को 4.1 फीसद पर लाने का लक्ष्य रखा। जेटली ने कहा कि देश के सामने गंभीर चुनौती है। दुनिया में आर्थिक मंदी का दौर है। ऐसे में सरकार ने आर्थिक मोर्चे पर अच्छा काम किया है।
वित्त मंत्री ने सरकार की उपलब्धियां गिनाते हुए कहा कि हमारा लक्ष्य गरीबों तक लाभ पहुंचाने का है। उन्होंने कहा कि सरकार की तीन बड़ी उपलब्धियां हैं- पहला, जन धन योजना, दूसरा, स्वच्छ भारत अभियान और तीसरा, कोयला खदान की पारदर्शी निलामी का विशेष तौर पर जिक्र किया। जेटली ने कहा कि वित्त वर्ष 2014-15 में हमने 50 लाख टॉयलेट बनाए। हमने छह करोड़ टॉयलेट बनाने का लक्ष्य निर्धारित किया।

अरुण जेटली ने कहा कि हमारा लक्ष्य है कि 2022 तक सभी के पास अपना घर हो। युवाओं के लिए रोजगार उपलब्ध करना हमारे लिए सबसे बड़ी चुनौती है। इसके लिए बड़े पैमाने पर स्किल डेवलपमेंट की योजना शुरू की गई है। उन्होंने मेक इन इंडिया योजना का जिक्र करते हुए कहा कि इससे बड़े पैमाने में रोजगार का सृजन होने की उम्मीद है। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि नए उद्योग को बढ़ावा देना जरूरी है।

वित्त मंत्री ने कहा कि मेरे सामने पांच प्रमुख चुनौतियां हैं। पहला- कृषि से कम आय, दूसरा-सरकारी घाटे को काबू करना, तीसरा- राजकीय अनुशासन को बनाए रखना, चौथा-मैनुफेक्चरिंग सेक्टर का जीडीपी गिरना और पांचवा-गरीबों तक सब्सिडी पहुंचाना।


Friday, 27 February 2015

वित्‍त मंत्री ने पेश किया आर्थिक सर्वेक्षण, दहाई अंक में पहुंच सकती है विकास दर

अरुण जेटली
अरुण जेटली
लोकसभा में देश का आर्थिक सर्वे बृहस्पतिवार को पेश किया गया। इसके तुरंत बाद शेयर बाजार में जबरदस्त उछाल देखने को मिला। सेंसेक्स 245 अंक ऊपर चढ़ गया। आर्थिक सर्वेक्षण में बड़े-बड़े आर्थिक सुधारों की बात कही गई है। रिपोर्ट में बताया गया है चालू वित्त वर्ष 2014-15 में विकास दर 7.4 प्रतिशत है और 2015-16 में 8.1 फीसद का लक्ष्य रखा गया है। उम्मीद जताई गई है आने वाले वर्षों में विकास दर 10 फीसद तक पहुंच सकता है।

इसके साथ ही बताया गया कि वित्तीय घाटे का लक्ष्य 4.1 फीसद रखा गया है जो मुमकिन है। रिपोर्ट में बताया गया है कि मोदी सरकार सब्सिडी को पूरी तरह खत्म नहीं करेगी। महंगाई दर में पिछले साल के मुकाबले काफी कमी आई है। आम बजट से पहले वित्त मंत्री हर साल संसद में आर्थिक सर्वेक्षण पेश करते हैं। पूरे देश की नजरें इस समय 28 फरवरी को पेश होने वाले आम बजट पर टिकी हुई हैं।

सर्वेक्षण में बताया गया कि सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में 8 फीसद की बढ़ोतरी का लक्ष्य, इसके लिए रेलवे में सार्वजनिक निवेश बढ़ाया जाएगा। साल 2014-15 में जीडीपी की दर 5.4 से 5.9 फीसद थी। जीडीपी की विकास दर मानसून पर बहुत अधिक निर्भर है। अगर इस साल भी देश में भरपूर बारिश नहीं होती है तो सरकार जीडीपी के लक्ष्य से पिछड़ सकती है।

Tuesday, 24 February 2015

भारी हंगामे के बीच लोकसभा में भूमि अधिग्रहण बिल पेश

संसद
संसद
बजट सत्र के दूसरे दिन मंगलवार को भूमि अधिग्रहण संशोधन बिल को लेकर संसद के सदनों में हंगामा जारी है। हंगामे के बीच ही ग्रामीण विकास मंत्री चौधरी बीरेंद्र सिंह ने आज लोकसभा में बिल पेश किया, जिसके बाद समूचे विपक्ष ने सदन से वॉकआउट यह कर दिया।

शून्यकाल में कांग्रेस की ओर से सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिंया ने मदर टेरेसा को लेकर आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत द्वारा की गई टिप्पणी का मुद्दा उठाया और सरकार से स्पष्टीकरण की मांग की। इस पर संसदीय कार्यमंत्री वेंकैया नायडू ने कहा कि टिप्पणी सदन के बाहर की गई है इसलिए सरकार का इससे कोई लेना-देना नहीं है।

दूसरी अोर, राज्यसभा में सदन के नेता व वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा कि अब तक देश में 639 अध्यादेश के जरिये कानून लागू किए गए और उनमें से 80 फीसद कांग्रेस के शासनकाल में हुए। नेहरू के काल में 70 अध्यादेश लाए गए। संयुक्त मोर्चा सरकार के 18 महीने के कार्यकाल में 77 अध्यादेश लाए गए। उन्होंने कहा कि आनंद शर्मा यूपीए सरकार की जिस सरकार में मंत्री थे वह भी कई अध्यादेश पारित करा चुकी है। इसलिए अध्यादेश के जरिये संसद की अनदेखी का आरोप सही नहीं है। उन्होंने कहा कि जब राज्यसभा में बिल पेश होगा तो सदस्य इस पर बहस करें और अगर किसी मुद्दे पर सहमति बनती है तो इसमें संशोधन भी किया जा सकता है। इस पर कांग्रेस के अानंद शर्मा ने कहा कि नेहरू के वक्त और आज के वक्त में बहुत अंतर है। जिस अध्यादेश का भाजपा विरोध करती थी वहीं काम उसकी सरकार क्यों कर रही है। कौन सा आपतकाल आ गया जो अध्यादेश लाया गया।

Source: Dainik Jagran News in Hindi