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Thursday, 19 March 2015

लैंड बिल पर गडकरी ने दिया सोनिया व अन्ना को खुली बहस का न्योता

भूमि अधिग्रहण बिल पर चौतरफा घिरी राजग सरकार के मंत्री नितिन गडकरी ने कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और गांधीवादी अन्ना हजारे सहित राजनीतिक दल के नेताओं से इस मुद्दे पर खुली बहस करने का अनुरोध किया है। सरकार इस विधेयक को लोकसभा में पास करा चुकी है लेकिन उसके लिए इस बिल को राज्यसभा में पास कराना मुश्किल हो रहा है, क्योंकि राज्यसभा में सरकार को बहुमत नहीं है।

उधर, कांग्रेस पार्टी मौके को भांपकर सरकार को इस मुद्दे पर बैकफुट पर लाने की कोशिश में जुट गई है। इस काम में कांग्रेस को अन्य विपक्षी पार्टियों का भी भरपूर सहयोग मिल रहा है। इस बात का अनुमान दो दिन पहले सोनिया के नेतृ्त्व में संसद से राष्ट्रपति भवन तक निकाले गए मार्च से लगाया जा सकता है। इस मार्च में कांग्रेस सहित 14 पार्टियां शामिल थी।

अब सरकार के खिलाफ इस अभियान में कांग्रेस को गांधीवादी अन्ना हजारे का सहयोग भी मिलता दिख रहा है। सरकार को घेरने में अब दोनों पास आते दिख रहे हैं। एेसे में सरकार की परेशानी बढ़ती जा रही है। उधर सरकार भी इस बिल पर झुकने को तैयार नहीं है।

Tuesday, 24 February 2015

भारी हंगामे के बीच लोकसभा में भूमि अधिग्रहण बिल पेश

संसद
संसद
बजट सत्र के दूसरे दिन मंगलवार को भूमि अधिग्रहण संशोधन बिल को लेकर संसद के सदनों में हंगामा जारी है। हंगामे के बीच ही ग्रामीण विकास मंत्री चौधरी बीरेंद्र सिंह ने आज लोकसभा में बिल पेश किया, जिसके बाद समूचे विपक्ष ने सदन से वॉकआउट यह कर दिया।

शून्यकाल में कांग्रेस की ओर से सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिंया ने मदर टेरेसा को लेकर आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत द्वारा की गई टिप्पणी का मुद्दा उठाया और सरकार से स्पष्टीकरण की मांग की। इस पर संसदीय कार्यमंत्री वेंकैया नायडू ने कहा कि टिप्पणी सदन के बाहर की गई है इसलिए सरकार का इससे कोई लेना-देना नहीं है।

दूसरी अोर, राज्यसभा में सदन के नेता व वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा कि अब तक देश में 639 अध्यादेश के जरिये कानून लागू किए गए और उनमें से 80 फीसद कांग्रेस के शासनकाल में हुए। नेहरू के काल में 70 अध्यादेश लाए गए। संयुक्त मोर्चा सरकार के 18 महीने के कार्यकाल में 77 अध्यादेश लाए गए। उन्होंने कहा कि आनंद शर्मा यूपीए सरकार की जिस सरकार में मंत्री थे वह भी कई अध्यादेश पारित करा चुकी है। इसलिए अध्यादेश के जरिये संसद की अनदेखी का आरोप सही नहीं है। उन्होंने कहा कि जब राज्यसभा में बिल पेश होगा तो सदस्य इस पर बहस करें और अगर किसी मुद्दे पर सहमति बनती है तो इसमें संशोधन भी किया जा सकता है। इस पर कांग्रेस के अानंद शर्मा ने कहा कि नेहरू के वक्त और आज के वक्त में बहुत अंतर है। जिस अध्यादेश का भाजपा विरोध करती थी वहीं काम उसकी सरकार क्यों कर रही है। कौन सा आपतकाल आ गया जो अध्यादेश लाया गया।

Source: Dainik Jagran News in Hindi