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Thursday, 26 February 2015

रेल बजट से पहले वेंकैया नायडू के बयान पर लोकसभा में हंगामा

बजट से पहले संसदीय कार्यमंत्री एम वेंकैया नायडू के बयान पर बवाल इतना बढ़ गया कि इसके चलते लोकसभा की कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी। विपक्ष ने कहा कि वेंकैया नायडू जब तक अपने बयान के लिए खेद प्रकट नहीं मांगेंगे, तब तक लोकसभा की कार्यवाही चलने नहीं दी जाएगी। हालांकि वेंकैया नायडू का कहना है कि उन्होंने कुछ गलत नहीं कहा है।

अपने बयान पर सफाई देते हुए वेंकैया नायडू ने कहा, 'मैंने सदन को बताया कि पिछली सरकार ने क्या किया और हम क्या करने की योजना बना रहे है। मुझे पता लगा है कि इससे कुछ लोगों को दुख पहुंचा। हालांकि मेरा किसी को दुख पहुंचाने का इरादा नहीं था। हम विपक्ष का सम्मान करते हैं। मैं हमेशा सदन को सच बताता हूं। मैंने कोई असंसदीय बात नहीं की है। कांग्रेस नेता ने जो बयान दिया, वो भी दर्ज है, लेकिन हमने उस पर कोई आपत्ति नहीं जताई है।'

उधर कांग्रेस नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि सरकार का दायित्व सभी दलों को साथ लेकर चलना होता है। उन्हें ऐसी बयानबाजी नहीं करनी चाहिए। वेंकैया नायडू को अपने बयान पर खुद खेद प्रकट करें। यह हमारे सम्मान की बात है। सोनिया गांधी ने भी कहा कि वेंकैया नायडू को अपने बयान पर माफी मांगनी चाहिए।

Source: Dainik Jagran Latest News in Hindi
 

Tuesday, 24 February 2015

भारी हंगामे के बीच लोकसभा में भूमि अधिग्रहण बिल पेश

संसद
संसद
बजट सत्र के दूसरे दिन मंगलवार को भूमि अधिग्रहण संशोधन बिल को लेकर संसद के सदनों में हंगामा जारी है। हंगामे के बीच ही ग्रामीण विकास मंत्री चौधरी बीरेंद्र सिंह ने आज लोकसभा में बिल पेश किया, जिसके बाद समूचे विपक्ष ने सदन से वॉकआउट यह कर दिया।

शून्यकाल में कांग्रेस की ओर से सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिंया ने मदर टेरेसा को लेकर आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत द्वारा की गई टिप्पणी का मुद्दा उठाया और सरकार से स्पष्टीकरण की मांग की। इस पर संसदीय कार्यमंत्री वेंकैया नायडू ने कहा कि टिप्पणी सदन के बाहर की गई है इसलिए सरकार का इससे कोई लेना-देना नहीं है।

दूसरी अोर, राज्यसभा में सदन के नेता व वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा कि अब तक देश में 639 अध्यादेश के जरिये कानून लागू किए गए और उनमें से 80 फीसद कांग्रेस के शासनकाल में हुए। नेहरू के काल में 70 अध्यादेश लाए गए। संयुक्त मोर्चा सरकार के 18 महीने के कार्यकाल में 77 अध्यादेश लाए गए। उन्होंने कहा कि आनंद शर्मा यूपीए सरकार की जिस सरकार में मंत्री थे वह भी कई अध्यादेश पारित करा चुकी है। इसलिए अध्यादेश के जरिये संसद की अनदेखी का आरोप सही नहीं है। उन्होंने कहा कि जब राज्यसभा में बिल पेश होगा तो सदस्य इस पर बहस करें और अगर किसी मुद्दे पर सहमति बनती है तो इसमें संशोधन भी किया जा सकता है। इस पर कांग्रेस के अानंद शर्मा ने कहा कि नेहरू के वक्त और आज के वक्त में बहुत अंतर है। जिस अध्यादेश का भाजपा विरोध करती थी वहीं काम उसकी सरकार क्यों कर रही है। कौन सा आपतकाल आ गया जो अध्यादेश लाया गया।

Source: Dainik Jagran News in Hindi