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Wednesday, 25 February 2015

जानिए, मदर टेरेसा विवाद पर कौन सी एक्ट्रेस ने ट्विटर पर निकाली भड़ास

दीया मिर्जा
दीया मिर्जा
मदर टेरेसा के बारे में जहां चारो तरफ बयानबाजी हो रही है, वहीं इस मामले में अब बॉलीवुड एक्ट्रेस दीया मिर्जा भी कूद पड़ी है। दीया का कहना है कि मदर के उपर सवाल उठाने वाले गलत है।

उन्होंने इस मामले में भारतीय जनता पार्टी की प्रवक्ता व सांसद मीनाक्षी लेखी पर भी निशाना साधा।

उन्होंने ट्विटर पर कहा, 'मीनाक्षी लेखी आपने ऐसे एक बयान को जिसकी निंदा की जानी चाहिए थी, उसे तोड़मरोड़ कर मान्य करने की कोशिश की है। यह बहुत ही शर्मिंदा करने वाली बात है।'

उन्होने कहा कि वास्तव पूरे घटनाक्रम से मैं शर्मिंदा महसूस कर रही हूं। हमारे विचारों को लेकर, हमारे कामों को लेकर और हमारे बयानों को लेकर मुझे शर्मिंदगी महसूस होती है कि हमारे देश में क्या हो रहा है।

वहीं, दीया मिर्जा के इस ट्विट पर “@prat_hindutv हैंडल से किसी ने उन्हें जबाव दिया, 'तुम्हारे जैसे धर्मनिरपेक्ष लोगों से और भला क्या उम्मीद की जा सकती है। तुमलोगों का कैरेक्टर ठीक नहीं है। '

इस ट्विट का दीया ने कुछ यूं जबाव दिया कि क्या किसी के धर्मनिरपेक्ष होने से आप उसके चरित्र पर सवाल उठाएंगे।

दीया ने आगे लिखा कि शर्म मुझे नहीं उनको आना चाहिए सच से घबराते हैं और सवालों का जबाव देने की बजाए मुद्दे से ध्यान भटकाने की कोशिश करते हैं।

दीया ने कहा, 'देश का यह हाल देखकर मेरा सिर शर्म से झुका जा रहा है।'
 
Source: Dainik Jagran Latest News in Hindi
 
 

Tuesday, 24 February 2015

भारी हंगामे के बीच लोकसभा में भूमि अधिग्रहण बिल पेश

संसद
संसद
बजट सत्र के दूसरे दिन मंगलवार को भूमि अधिग्रहण संशोधन बिल को लेकर संसद के सदनों में हंगामा जारी है। हंगामे के बीच ही ग्रामीण विकास मंत्री चौधरी बीरेंद्र सिंह ने आज लोकसभा में बिल पेश किया, जिसके बाद समूचे विपक्ष ने सदन से वॉकआउट यह कर दिया।

शून्यकाल में कांग्रेस की ओर से सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिंया ने मदर टेरेसा को लेकर आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत द्वारा की गई टिप्पणी का मुद्दा उठाया और सरकार से स्पष्टीकरण की मांग की। इस पर संसदीय कार्यमंत्री वेंकैया नायडू ने कहा कि टिप्पणी सदन के बाहर की गई है इसलिए सरकार का इससे कोई लेना-देना नहीं है।

दूसरी अोर, राज्यसभा में सदन के नेता व वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा कि अब तक देश में 639 अध्यादेश के जरिये कानून लागू किए गए और उनमें से 80 फीसद कांग्रेस के शासनकाल में हुए। नेहरू के काल में 70 अध्यादेश लाए गए। संयुक्त मोर्चा सरकार के 18 महीने के कार्यकाल में 77 अध्यादेश लाए गए। उन्होंने कहा कि आनंद शर्मा यूपीए सरकार की जिस सरकार में मंत्री थे वह भी कई अध्यादेश पारित करा चुकी है। इसलिए अध्यादेश के जरिये संसद की अनदेखी का आरोप सही नहीं है। उन्होंने कहा कि जब राज्यसभा में बिल पेश होगा तो सदस्य इस पर बहस करें और अगर किसी मुद्दे पर सहमति बनती है तो इसमें संशोधन भी किया जा सकता है। इस पर कांग्रेस के अानंद शर्मा ने कहा कि नेहरू के वक्त और आज के वक्त में बहुत अंतर है। जिस अध्यादेश का भाजपा विरोध करती थी वहीं काम उसकी सरकार क्यों कर रही है। कौन सा आपतकाल आ गया जो अध्यादेश लाया गया।

Source: Dainik Jagran News in Hindi