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Friday, 27 March 2015

लैंड बिल पर सोनिया ने की मोदी सरकार की आलोचना

लैंड बिल पर बहस करने के राजग सरकार के अनुरोध को खारिज करते हुए कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने इस बिल को किसान विरोधी बताते हुए मोदी सरकार की कड़ी आलोचना की है। सोनिया ने मोदी सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि यह सरकार गरीब विरोधी है। कुछ उद्योगपतियों को लाभ पहुंचाने के लिए यह सरकार समाज के कमजोर वर्गों के अधिकारों के साथ समझौता कर रही है।

सोनिया गांधी ने भूमि अधिग्रहण बिल के मुद्दे पर केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी को पत्र लिखकर जवाब देते हुए कहा कि कांग्रेस नये विधेयक में लाए गए बदलाव का समर्थन नहीं करती है। गौरतलब है कि गडकरी ने सोनिया को इस मुंद्दे पर खुली बहस करने का अनुरोध किया था।

सोनिया ने सरकार से क्षुद्र राजनीतिक मानसिकता से ऊपर उठने और भूमि विधेयक को संपूर्ण रूप से वापस लेने को कहा। सोनिया ने कहा कि कांग्रेस ऐसे किसी कानून का समर्थन नहीं कर सकती जो किसानों को नुकसान पहुंचाता हो। उन्होंने कहा कि एकतरफा ढंग से किसान विरोधी कानून थोपने के बाद चर्चा का प्रस्ताव लाना, दलों के बीच आमसहमति बनाने का मखौल उड़ाना है।

 

Saturday, 28 February 2015

आम बजट 2015ः रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता पर जोर, 2,86,727 करोड़ आवंटन

मोदी सरकार के पहले पूर्ण बजट में रक्षा क्षेत्र पर विशेष ध्यान दिया गया है। जैसी की पहले ही संभावना थी कि रक्षा बजट के आवंटन में अच्छी खासी बढ़ोतरी की जाएगी। भारतीय सेना इस समय आधुनिकीकरण के दौर से गुजर रही है। इसके लिए बजट में काफी बढ़ोत्तरी किए जाने की जरूरत थी। बजट में रक्षा क्षेत्र के लिए 2,86, 727 करोड़ रुपये का आवंटन किया गया है।

वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा कि देश की रक्षा सबसे महत्वपूर्ण है। रक्षा बजट में इस बार आत्मनिर्भरता पर जोर दिया गया है। स्वदेशी क्षेत्र में निर्णाण के लिए आवंटन में प्राथमिकता दी गई है।

वर्ष 2013-14 के बजट में रक्षा क्षेत्र के लिए 2,03, 672 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया था जबकि अगले बजट में इसमें 12 फीसद की बढ़ोत्तरी की गई थी। 2014-15 में पेश बजट में इसे बढ़ाकर 2,24,000 करोड़ रुपये कर दिया गया था।

 

Friday, 27 February 2015

संसद में बोले पीएम मोदी- हमारी सरकार में है इच्छाशक्ति

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज लोकसभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर अपना बयान दिया। उन्होंने कहा कि चर्चा सार्थक रही। मोदी ने कहा कि हम समस्याओं का समाधान खोज रहे हैं। हमें समस्याएं विरासत में मिली है। उन्होंने कहा कि हम पर आरोप लगाया जा रहा है कि उनकी योजनाओं का नाम बदल रहे हैं। लेकिन मुद्दा नाम नहीं समस्या है। मोदी ने जोर देकर कहा कि हमारी सरकार में इच्छाशक्ति है। हम समस्याओं का समाधान करेंगे।

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि लोगों को भरोसा है कि समस्याओं का समाधान होगा। उन्होंने कहा कि स्वच्छता अभियान हमारी सरकार का ही नहीं है, यह 125 करोड़ लोगों का अभियान है।

उन्होंने कहा कि मेरी राजनीतिक सूझबूझ पर कभी शक न करें। मैं मनरेगा को कभी बंद नहीं करूंगा। लेकिन यह जान लीजिए कि मनरेगा आपके साठ सालों की विफलता का फल है। साठ साल बाद लोगों को गड्ढे खोदने के लिए भेजा गया।

 

वित्‍त मंत्री ने पेश किया आर्थिक सर्वेक्षण, दहाई अंक में पहुंच सकती है विकास दर

अरुण जेटली
अरुण जेटली
लोकसभा में देश का आर्थिक सर्वे बृहस्पतिवार को पेश किया गया। इसके तुरंत बाद शेयर बाजार में जबरदस्त उछाल देखने को मिला। सेंसेक्स 245 अंक ऊपर चढ़ गया। आर्थिक सर्वेक्षण में बड़े-बड़े आर्थिक सुधारों की बात कही गई है। रिपोर्ट में बताया गया है चालू वित्त वर्ष 2014-15 में विकास दर 7.4 प्रतिशत है और 2015-16 में 8.1 फीसद का लक्ष्य रखा गया है। उम्मीद जताई गई है आने वाले वर्षों में विकास दर 10 फीसद तक पहुंच सकता है।

इसके साथ ही बताया गया कि वित्तीय घाटे का लक्ष्य 4.1 फीसद रखा गया है जो मुमकिन है। रिपोर्ट में बताया गया है कि मोदी सरकार सब्सिडी को पूरी तरह खत्म नहीं करेगी। महंगाई दर में पिछले साल के मुकाबले काफी कमी आई है। आम बजट से पहले वित्त मंत्री हर साल संसद में आर्थिक सर्वेक्षण पेश करते हैं। पूरे देश की नजरें इस समय 28 फरवरी को पेश होने वाले आम बजट पर टिकी हुई हैं।

सर्वेक्षण में बताया गया कि सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में 8 फीसद की बढ़ोतरी का लक्ष्य, इसके लिए रेलवे में सार्वजनिक निवेश बढ़ाया जाएगा। साल 2014-15 में जीडीपी की दर 5.4 से 5.9 फीसद थी। जीडीपी की विकास दर मानसून पर बहुत अधिक निर्भर है। अगर इस साल भी देश में भरपूर बारिश नहीं होती है तो सरकार जीडीपी के लक्ष्य से पिछड़ सकती है।

Thursday, 26 February 2015

एनडीए शासन में बढ़ीं सांप्रदायिक हिंसा की घटनाएं: रिपोर्ट

सुशासन और विकास करने का वादा कर नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री की कुर्सी तक पहुंचे। आम जनता ने नरेंद्र मोदी पर विश्वास किया और उन्हें पूर्ण बहुमत दिया। ऐसे में उम्मीद की जा रही थी कि देश में अब सुशासन होगा और विकास की लहर चलेगी। लेकिन क्या ऐसा हुआ है, मानवाधिकार समूह एमनेस्टी इंटरनेशनल की मानें तो मोदी सरकार के कार्याकाल के दौरान देश में सांप्रदायिक हिंसाओं में इजाफा हुआ है।

एमनेस्टी इंटरनेशनल की वार्षिक रिपोर्ट में मोदी सरकार की काफी आलोचना की गई है। रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत में एनडीए सरकार के शासन के में सांप्रदायिक हिंसाएं बढ़ गई हैं। इस दौरान उत्तर प्रदेश और कुछ अन्य राज्यों में सांप्रदायिक हिंसा में बढ़ोतरी हुई। सांप्रदायिक हिंसा का जिक्र करते हुए कहा गया है, 'चुनाव से पहले उत्तर प्रदेश दो समुदायों के बीच सांप्रदायिक घटनाएं हुईं। इससे वहां पूरे क्षेत्र में तनाव पैदा हो गया। मोदी सरकार के दौरान नेताओं की जुबान भी बेलगाम रही है, कुछ नेताओं पर भी भड़काऊ भाषण देकर हिंसा भड़काने की कोशिश के आरोप लगे हैं।

Source: Dainik Jagran Latest News in Hindi