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Saturday, 28 February 2015

घरेलू विनिर्माण और ‘मेक इन इंडिया’ के जरिए रोजगार बढ़ाएगी सरकार

बड़ी संख्या में रोजगारों के सृजन हेतु घरेलू विनिर्माण एवं ‘मेक इन इंडिया’ को प्रोत्साहन देने के लिए केन्द्रीय वित्त मंत्री श्री अरुण जेटली ने आज संसद में पेश आम बजट 2015-16 में सीमा शुल्क एवं उत्पाद शुल्क में अनेक रियायतों की घोषणा की। कुछ खास कच्चे माल जैसे धातु पुर्जे, इन्सुलेटेड वायर एवं केबल, रेफ्रिजरेटर कम्प्रेशर के कलपुर्जों, वीडियो कैमरा के कंपाउंड्स इत्यादि पर सीमा शुल्क घटा दिया गया है।

इसी तरह लेथ मशीनों में इस्तेमाल होने वाले कुछ खास कच्चे माल पर देय बुनियादी सीमा शुल्क को 7.5 फीसदी से घटाकर 2.5 फीसदी और एलसीडी/एलईडी टीवी पैनलों पर बुनियादी सीमा शुल्क को 10 फीसदी से घटाकर शून्य किया जा रहा है। पेसमेकर के निर्माण में इस्तेमाल होने वाले विशेष कच्चे माल पर सीवीडी और एसएडी से पूरी तरह छूट दी जा रही है।

 

बजट 2015: आयकर छूट में कोई बदलाव नहीं, सर्विस टैक्‍स बढ़ा

वित्त मंत्री अरुण जेटली वित्तीय वर्ष 2015-16 का आम बजट लोकसभा में पेश किया। वित्त मंत्री ने अपने बजट भाषण में आर्थिक स्थिति पर संतोष प्रकट करते हुए कहा कि देश का जीडीपी 7.4 फीसद रहने का अनुमान है। उन्हाेंने राजकोषीय घाटा को 4.1 फीसद पर लाने का लक्ष्य रखा। जेटली ने कहा कि देश के सामने गंभीर चुनौती है। दुनिया में आर्थिक मंदी का दौर है। ऐसे में सरकार ने आर्थिक मोर्चे पर अच्छा काम किया है।
वित्त मंत्री ने सरकार की उपलब्धियां गिनाते हुए कहा कि हमारा लक्ष्य गरीबों तक लाभ पहुंचाने का है। उन्होंने कहा कि सरकार की तीन बड़ी उपलब्धियां हैं- पहला, जन धन योजना, दूसरा, स्वच्छ भारत अभियान और तीसरा, कोयला खदान की पारदर्शी निलामी का विशेष तौर पर जिक्र किया। जेटली ने कहा कि वित्त वर्ष 2014-15 में हमने 50 लाख टॉयलेट बनाए। हमने छह करोड़ टॉयलेट बनाने का लक्ष्य निर्धारित किया।

अरुण जेटली ने कहा कि हमारा लक्ष्य है कि 2022 तक सभी के पास अपना घर हो। युवाओं के लिए रोजगार उपलब्ध करना हमारे लिए सबसे बड़ी चुनौती है। इसके लिए बड़े पैमाने पर स्किल डेवलपमेंट की योजना शुरू की गई है। उन्होंने मेक इन इंडिया योजना का जिक्र करते हुए कहा कि इससे बड़े पैमाने में रोजगार का सृजन होने की उम्मीद है। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि नए उद्योग को बढ़ावा देना जरूरी है।

वित्त मंत्री ने कहा कि मेरे सामने पांच प्रमुख चुनौतियां हैं। पहला- कृषि से कम आय, दूसरा-सरकारी घाटे को काबू करना, तीसरा- राजकीय अनुशासन को बनाए रखना, चौथा-मैनुफेक्चरिंग सेक्टर का जीडीपी गिरना और पांचवा-गरीबों तक सब्सिडी पहुंचाना।