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Thursday, 26 March 2015

पीएम से मिले नीतीश, बिहार के लिए मांगा 'विशेष दर्जा'

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच साउथ ब्लॉक में हुई बैठक खत्म हो गई है। बैठक के बाद नीतीश कुमार ने कहा कि प्रधानमंत्री ने उन्हें बिहार की मदद की मदद करने का आश्वासन दिया है। बिहार के मुखिया नीतीश शुक्रवार को दिल्ली सचिवालय में सीएम अरविंद केजरीवाल से भी मिल सकते हैं।

नीतीश कुमार ने कहा कि उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को बताया कि बिहार की आर्थिक स्थिति काफी खराब है। बिहार को केंद्र से मदद की दरकार है। साथ ही नीतीश कुमार ने प्रधानमंत्री से बिहार को विशेष राज्य का दर्जा देने की भी अपील की, ताकि राज्य की आर्थिक स्थिति में सुधार आ सके।

भाजपा के वरिष्ठ नेता शाहनवाज हुसैन ने कहा है कि इस मुलाकात के राजनीतिक मायने नहीं निकाले जाने चाहिए। यह बिहार के विकास को लेकर एक गैर राजनीतिक मुलाकात थी।

Friday, 27 February 2015

बहुत दिनों बाद मिले मोदी व नीतीश तो हाथ भी मिला लिया!

देश के दो अत्यंत लोकप्रिय सियासी घरानों के बीच अब रिश्तों की डोर बंध गई है। बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव की बेटी राजलक्ष्मी और उत्तरप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव के पौत्र तेजप्रताप यादव का विवाह गुरुवार को दिल्ली के आलीशान अशोका होटल में संपन्न हुआ।

दो बड़े सियासी घरानों की शादी में राजनीति की कई नामचीन हस्तियों ने हिस्सा लिया। जिनमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और वरिष्ठ भाजपा नेता लालकृष्ण आडवाणी प्रमुख हैं।

इसके अलावा कुछ ही पलों में अतिविशिष्ट अतिथियों का तांता लग गया, लेकिन सबकी निगाहें जाकर टिकी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर। जब नीतीश कुमार दूल्हा-दुल्हन को आशीर्वाद देने मंच पर पहुंचे तब मुलायम सिंह यादव ने उनका गर्मजोशी से स्वागत किया।

मीडिया में चल रही खबरों के मुताबिक शादी समारोह में शामिल हुए पीएम नरेंद्र मोदी और नीतीश कुमार एक दूसरे से मिले और हाथ मिलाकर अभिवादन किया।

 

Tuesday, 24 February 2015

मांझी के ये 10 फैसले नीतीश के लिए किसी चुनौती से कम नहीं

सीएम नीतीश कुमार
सीएम नीतीश कुमार
बिहार की राजनीति में पिछले दिनों हुए घमासान के बाद भले ही अब यहां की राजनीतिक परिस्थितियां बदल गई है। लेकिन पूर्व मुख्यमंत्री जीतनराम मांझी द्वारा अपने कार्यकाल के अंतिम समय में लिए कई फैसलों को बदलना मौजूदा सीएम नीतीश कुमार के लिए किसी चुनौती से कम नहीं है। दरअसल, अपनी कुर्सी जाती देख मांझी ने कार्यकाल के अंतिम दिनों में कई बड़े फैसले लिए थे इनमें दलितों को जमीन देना, महादलितों को सुविधाएं बढ़ाना, पुलिसकर्मियों के वेतन संबंधित जैसे कई फैसले शामिल थे।

दलितों को अधिक जमीन -

2008 में नीतीश कुमार ने ढाई लाख महादलित परिवारों को तीन डेसीमल [1306 वर्ग फीट] भूमि दी जाएगी, जिनमें से 50 हजार को लाभ मिल चुका है। मांझी ने इसे बढ़ाकर पांच डेसीमल कर दिया। राज्य सरकार इस जमीन को मार्केट रेट से सरकार खरीद कर महादलितों को देगी। संशोधित निर्णय के लिए अतिरिक्त बजट की आवश्यकता होगी।

पासवान जैसे महादलित -

कार्यकाल के अंतिम समय के दौरान मांझी ने महादलितों के दलितों के साथ अंतर को कम किया तथा सुविधाएं बढ़ाने को कोशिश की। इस वोट बैंक के लिए रामविलास पासवान की धमकी के बाद मांझी के लिए इस निर्णय को वापस लेना भी नीतिश के लिए मुश्किल होगा।

शुल्क छूट -

मांझी ने दो माह पहले फैसला लिया था कि एससी व एसटी से संबंधित छात्राओं से स्नातक की पढ़ाई के दौरान कोई फीस नहीं ली जाएगी। महिला मतदाताओं के लिए यह योजना जाति विशेष के लिए देखी जा रही थी। नीतीश कुमार इस फैसले को रद करते हैं तो यह फैसला महादलितों को उनके खिलाफ कर सकता है।

महिला कोटा -

मांझी ने नीतीश के पूर्व के कार्यकाल के दौरान सरकारी नौकरी में मिलने वाले कोटे को 35 फीसद बढ़ा दिया। अगर नीतीश इस फैसले को वापस लेते हैं तो मांझी इसका फायदा उठाने की कोशिश करेंगे।


Source: Dainik Jagran Latest News in Hindi