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Friday, 20 February 2015

डूब गई मांझी की नैया, नीतीश समर्थकों में जीत का जश्न

बिहार विधानसभा में विश्वास प्रस्ताव का सामना करने से पहले ही मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी ने शुक्रवार सुबह इस्तीफा दे दिया। मांझी ने कहा कि उनके समर्थक विधायकों को जान से मारने की धमकियां दी गईं। विधानसभा अध्यक्ष से भी उन्हें न्याय की उम्मीद नहीं थी। मांझी विधानसभा में आज ही विश्वास प्रस्ताव पेश करने वाले थे। मुख्यमंत्री के इस्तीफे से उत्पन्न स्थिति के बाद विधानमंडल के दोनों सदनों को अनिश्चित काल के लिए स्थगित कर दिया गया। वहीं इस्तीफे की सूचना मिलते ही नीतीश समर्थकों के बीच खुशी की लहर दौड़ गई। जदयू कार्यालय से विधानसभा तक जश्न का दौर शुरू हो गया।

मुख्यमंत्री मांझी के इस्तीफे के बाद नीतीश कुमार समर्थकों में जश्न का माहौल है। राज्यपाल ने मांझी के इस्तीफे को स्वीकार करते हुए उन्हें नई सरकार के गठन तक कार्यवाहक मुख्यमंत्री बने रहने को कहा है। इस्तीफे की खबर आते ही नीतीश कुमार समर्थक विधायक सात सर्कुलर रोड पर पहुंचे। वहां जदयू विधायक दल की बैठक हुई। उम्मीद जताई जा रही है कि जल्द नीतीश कुमार के नेतृत्व में नई सरकार बनेगी।

मांझी के इस्तीफे की खबर आने के बाद नीतीश कुमार ने पत्रकारों से कहा, यह काम बहुत पहले हो जाना चाहिए था। सरकार बनाने के लिए जोड़तोड़ की पूरी कोशिश की गई। इसमें सफलता न मिलने पर मुख्यमंत्री ने इस्तीफा देने का फैसला किया। भाजपा का गेम प्लान एक्सपोज हो गया।
 
Source: Dainik Jagran Latest News in Hindi 
 

राज्यपाल ने नीतीश कुमार को राजभवन बुलाया

जीतन राम मांझी के इस्तीफा देने के बाद राज्यपाल केशरी नाथ त्रिपाठी ने जदयू के विधायक दल के नेता नीतीश कुमार को राजभवन बुलाया है। बताया जाता है कि राज्यपाल नीतीश कुमार को सरकार बनाने के लिए आमंत्रित कर सकते हैं। नीतीश के साथ जदयू के प्रदेश अध्यक्ष वशिष्ठ नारायण सिंह, अशोक चौधरी, रामचंद्र पूर्वे, सदानंद सहित कई अन्य लोग भी राजभवन पहुंचे हैं। 

पूर्व मंत्री नरेन्द्र नारायण यादव ने कहा कि नीतीश कुमार के नेतृत्व में जितनी जल्द सरकार बने, वह राज्य के हित के लिए अच्छा होगा। नीतीश जी के पास पूर्ण बहुमत है। उन्हें 130 विधायकों का समर्थन हासिल है। इसलिए बिना समय गंवाए राज्यपाल महोदय को सरकार गठन के लिए नीतीश जी को आमंत्रित करना चाहिए। नरेन्द्र नारायण यादव ने जीतन राम मांझी के इस्तीफे से जुड़े सवाल पर कहा कि यह लोकतंत्र की जीत है। अल्पमत सरकार का नेतृत्व करने वाले मांझी ने लोकतंत्र का गला घोंटने वाली भाजपा का समर्थन लेना मुनासिब नहीं समझा। इसलिए मांझी जी ने सदन में बहुमत साबित करने से पहले मुख्यमंत्री पद से अपना इस्तीफा दे दिया। उन्होंने भाजपा पर आरोप लगाया कि पूरे खेल के पीछे भाजपा काम कर रही थी और उसने मांझी को समर्थन देकर अपने मंसूबे को सही साबित भी कर दिया। मगर मांझी के इस्तीफे से भाजपा का चाल, चरित्र और चेहरा जनता के सामने बेनकाब हो गया है। विधानसभा चुनाव में भाजपा को राज्य में राजनीतिक अस्थिरता का जवाब जनता को देना पड़ेगा।

Source: Dainik Jagran Latest News in Hindi