सूबे की नई हुकूमत ने बिजली हाफ और पानी माफ के चुनावी जुमले को सच साबित कर दिया है, लेकिन सरकार के इस लोकलुभावन फैसले से आमदनी अठन्नी और खर्चा रुपैया वाली कहावत भी सच साबित हो गई है। विशेषज्ञों की मानें तो अब सरकारी खजाने पर घाटे का बोझ बढ़कर करीब छह हजार करोड़ रुपये हो जाएगा और इससे दिल्ली का विकास निश्चित रूप से प्रभावित होगा।
आम आदमी पार्टी (आप) की सरकार ने अपने चुनावी वादे को पूरा करते हुए 400 यूनिट तक बिजली के बिल को आधा करने और 20 हजार लीटर पानी प्रति परिवार प्रतिमाह मुफ्त देने का ऐलान कर दिया है। पहली मार्च से यह सुविधा दिल्ली के लोगों को मिल जाएगी। जाहिर तौर पर लाखों लोगों को सरकार के इस फैसले का फायदा होगा। लेकिन इस फैसले का ऐलान करते हुए खुद उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने भी यह स्वीकार किया कि वर्तमान दरों पर सरकार पर प्रतिवर्ष करीब 1700 करोड़ रुपये का बोझ पड़ेगा।
बता दें कि मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने दिल्ली विधानसभा में मंगलवार को कहा कि चालू वित्त वर्ष में सरकार की राजस्व वसूली में करीब 4500 करोड़ की कमी आई है और इस घाटे को पूरा करने के लिए सरकारी खर्चो में कटौती की जाएगी। जाहिर है कि 1700 करोड़ रुपये का बोझ और बढ़ने के बाद अगले साल यह घाटा छह हजार करोड़ के उपर पहुंच जाएगा।
आम आदमी पार्टी (आप) की सरकार ने अपने चुनावी वादे को पूरा करते हुए 400 यूनिट तक बिजली के बिल को आधा करने और 20 हजार लीटर पानी प्रति परिवार प्रतिमाह मुफ्त देने का ऐलान कर दिया है। पहली मार्च से यह सुविधा दिल्ली के लोगों को मिल जाएगी। जाहिर तौर पर लाखों लोगों को सरकार के इस फैसले का फायदा होगा। लेकिन इस फैसले का ऐलान करते हुए खुद उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने भी यह स्वीकार किया कि वर्तमान दरों पर सरकार पर प्रतिवर्ष करीब 1700 करोड़ रुपये का बोझ पड़ेगा।
बता दें कि मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने दिल्ली विधानसभा में मंगलवार को कहा कि चालू वित्त वर्ष में सरकार की राजस्व वसूली में करीब 4500 करोड़ की कमी आई है और इस घाटे को पूरा करने के लिए सरकारी खर्चो में कटौती की जाएगी। जाहिर है कि 1700 करोड़ रुपये का बोझ और बढ़ने के बाद अगले साल यह घाटा छह हजार करोड़ के उपर पहुंच जाएगा।
Source: Dainik Jagran Latest News in Hindi