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Thursday, 19 February 2015

पीएम के बहुचर्चित लखटकिया सूट की बोली 1.41 करोड़ पहुंची

विवादास्पद मोनोग्राम सूट
विवादास्पद मोनोग्राम सूट
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विवादास्पद मोनोग्राम वाले बंद गले के सूट की नीलामी में अब तक की सबसे ऊंची बोली सूरत के कमल कांत शर्मा ने लगाई है। प्रधानमंत्री का नाम लिखे इस नीले रंग के सूट की अब तक की अधिकतम बोली 1.41 करोड़ रुपये तक पहुंच गई है। अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा से मुलाकात के दौरान पीएम द्वारा पहने इस लखटकिया सूट पर सियासी रोटियां तब से अब तक सेंकी जा रही हैं।

इससे पहले सूरत के मुकेश पटेल ने इस सूट के लिए 1.39 करोड़ रुपए और ग्लोबल फ्रेंड्स ग्रुप ने 1.25 करोड़ रुपए की बोली लगाई थी। ग्लोबल फ्रेंड्स ग्रुप के राजेश माहेश्वरी ने कहा था कि यह हमारे दोस्तों का एक ग्रुप है और सभी दोस्तों ने फैसला किया है कि हम सब मिलकर 50-50 हजार रुपए इक्कठा करेंगे।

इससे पहले सूरत के कारोबारी राजेश जुनेजा ने लिखित बोली में मोदी के नेवी ब्लू रंग के सूट की कीमत 1.21 करोड़ रुपये लगाई थी। उनका कहना है कि मोदी उनके रोल मॉडल हैं। वह ये सूट अपने पास यादगार के तौर पर रखना चाहते हैं। अगर बोली ऊपर गई तो वह दौड़ में बने रहना चाहेंगे। लेकिन ज्यादा दुश्वारी हुई तो वह पीछे हट जाएंगे।

इससे पूर्व, एनआरआइ उद्योगपति विराल चोकसी ने इस सूट पर 1.11 करोड़ रुपये की बोली लगाई थी। उनसे पहले कपड़ा व्यापारी सुरेश अग्रवाल ने एक करोड़ की बोली लगाई थी। उससे पहले रीयल इस्टेट डीलर राजू अग्रवाल ने 51 लाख रुपये की बोली लगाई थी। पहली बोली सूरत के सीए पंकज ने 11 लाख की लगाई।

Source: Dainik Jagran Latest News in Hindi
 

Wednesday, 18 February 2015

जेल से बाहर आते ही वंजारा ने गुजरात पुलिस का किया बचाव

डीजी वंजारा
डीजी वंजारा
इशरत जहां केस में लगभग आठ साल से जेल में बंद डीजी वंजारा आज जेल से बाहर आ गए हैं। हाल ही में सीबीआइ की एक विशेष अदालत ने डीजी बंजारा और पीपी पांडेय को जमानत दी थी। वंजारा इशरत जहां और तीन अन्य की कथित फर्जी मुठभेड़ मामले में हत्या करने के आरोप में जेल में बंद थे। जेल से निकलते ही वंजारा ने गुजरात पुलिस का बचाव किया।

जेल से रिहा होने के बाद वंजारा ने कहा कि गुजरात पुलिस ने कुछ भी गलत नहीं किया। पुलिस ने नागरिकों की रक्षा की है। आतंकवाद अंतरराष्ट्रीय समस्या है। हर किसी की जिम्मेदारी है कि वो आतंकवाद से लड़े। सभी आरोपी निरपराध हैं। सिर्फ चार्जशीट ही दाखिल की गई है। गुजरात पुलिस निर्दोष है और ये बात कोर्ट में साबित हो गई है।वंजारा ने कहा कि करीब 8 साल से गुजरात के 32 पुलिसकर्मी जेल में हैं। वे सभी निर्दोष हैं। पुलिस का काम आम नागरिकों को बचाना होता है। पहली बार गुजरात पुलिस को इंसाफ मिल रहा है। उन्होंने कहा कि हमारी हिम्मत जेल में रहकर भी नहीं टूटी है। भारतीय न्याय व्यवस्था में देरी हो सकती है, लेकिन मिलता जरूर है। जेल में बंद दूसरे पुलिस कर्मी भी जल्द छूट जाएंगे।

आपको बता दें कि 15 जून 2004 को शहर के बाहरी इलाके में एक मुठभेड़ में अहमदाबाद अपराध शाखा के अधिकारियों ने मुंबई की 19 वर्षीय छात्र इशरत जहां, प्रनेश पिल्लै उर्फ जावेद शेख, अमजद अली राना और जीशान जौहर की कथित रुप से हत्या कर दिया था।

Source: Dainik Jagran Latest News in Hindi