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Wednesday, 18 March 2015

नवरात्र इस बार आठ दिनी, घोड़ा पर आगमन, मुर्गा पर विदाई

शक्ति की अधिष्ठात्री भगवती की आराधना-उपासना का पर्व नवरात्र सनातन धर्म में उत्साह व उल्लास पूर्वक मनाने की परंपरा है। वर्ष के दो नवरात्रों में शारदीय नौ दुर्गा व वासंतिक नौ गौरी व्रत तथा दर्शन-पूजन को समर्पित है।

वासंतिक नवरात्र का आरंभ हिंदू नववर्ष चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से होता है। इसे चैत्रीय नवरात्र भी कहा जाता है। इस बार चैत्रीय नवरात्रारंभ 21 मार्च शनिवार को समापन 28 मार्च शनिवार को हो रहा है। षष्ठी तिथि क्षय के कारण इस बार नवरात्र आठ दिनों का है।

घोड़ा पर आगमन, मुर्गा पर विदाई- ख्यात ज्योतिषाचार्य ऋषि द्विवेदी के अनुसार माता का आगमन इस बार घोड़ा पर और गमन मुर्गा पर हो रहा। इसके अनुसार माता का आना और जाना दोनों इस बार शुभ नहीं। इससे देश पर विपत्ति, किसी बड़े राजनेता का निधन, आतंकवादी घटनाएं, दैवीय आपदा, भूकंप, आमजन में व्याकुलता, उग्रता देखने को मिलेगी।

21 मार्च कलश स्थापन- कलश स्थापन ध्वजारोपण का शुभ समय स्थिर वृष लग्न प्रात: 8.48 से 10.44 तक है।

अभिजीत मुहूर्त प्रात: 11.36 से 12.24 तक भी कलश स्थापन किया जा सकता है।

नवरात्र का हवन 28 की रात-

अष्टमी व्रत रखने वालों के लिए 28 मार्च को नवमी में प्रात: 5.12 के बाद पारन कर सकते हैं। नवरात्र की पारणा 29 को दशमी में प्रात: 5.55 के बाद की जाएगी। नवरात्र का हवन आदि अनुष्ठान 28 की रात या 29 मार्च की भोर 5.54 से करना शास्त्र सम्मत होगा।

तारीखवार नवरात्र तिथि-

21-नवरात्र प्रथम दिन (प्रतिपदा दिन में 1.04 तक)

22- द्वितीया दिन में 10.55 तक

23-तृतीया सुबह 8.58 तक

24-चतुर्थी प्रात: 7.22 तक

25-प्रात: 6.07 तक पंचमी और उसके बाद षष्ठी

26- सुबह 5.21 तक षष्ठी फिर सप्तमी

27-भोर 5 बजे तक सप्तमी, फिर दुर्गाष्टमी व्रत

28-नवमी दिन भर। रात 10 से 12 तक नवरात्र हवन।

29-प्रात: 5.54 बाद नवरात्र व्रत पारण।