वरिष्ठ प्रशासक जगमोहन डालमिया लगभग एक दशक बाद एक बार फिर भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआइ) के अध्यक्ष बन गए हैं। 74 वर्षीय डालमिया एन श्रीनिवासन गुट की ओर से अध्यक्ष पद के उम्मीदवार थे। बंगाल क्रिकेट संघ के अध्यक्ष डालमिया शीर्ष पद के प्रबल दावेदार थे, क्योंकि किसी और नाम पर सर्वसम्मति नहीं बन सकी। अध्यक्ष पद नामांकन का समय रविवार को दोपहर तीन बजे तक का था। लेकिन तब तक किसी और उम्मीदवार ने नामांकन नहीं किया। वहीं, अनुराग ठाकुर बीसीसीआइ के नए सचिव चुने गए हैं। जबकि अमिताभ चौधरी संयुक्त सचिव का चुनाव जीते और अनिरुद्ध चौधरी नए कोषाध्यक्ष बने। इसके अलावा टीसी मैथ्यूज और सीके खन्ना बोर्ड के उपाध्यक्ष पद के लिए चुने गए हैं।
- निर्विरोध चुने गए डालमियाः
डालमिया का रास्ता इसलिए भी साफ हो गया था, क्योंकि एक अन्य पूर्व अध्यक्ष शरद पवार को पूर्वी क्षेत्र से प्रस्तावक नहीं मिला। पूर्व क्षेत्र की सभी छह इकाइयां श्रीनिवासन गुट की समर्थक हैं। बीसीसीआइ सूत्रों ने कहा, 'इस बार पूर्वी क्षेत्र की बारी थी इसलिए डालमिया के पास पूर्व से प्रस्तावक और अनुमोदनकर्ता दोनों थे।' हालांकि पवार शनिवार को ही यहां पहुंच गए थे और उन्होंने अपने समर्थकों के साथ बैठक भी की। मजे की बात यह है कि दोनों गुट डालमिया को अपना उम्मीदवार बता रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के कारण श्रीनिवासन मजबूर होकर अध्यक्ष पद का चुनाव नहीं लड़ सके। वह चुनाव प्रक्रिया के दौरान केवल मतदान कर पाए। अदालत ने श्रीनिवासन की बीसीसीआइ अध्यक्ष और आइपीएल टीम मालिक के तौर पर हितों के टकराव की कड़ी आलोचना की थी।
- निर्विरोध चुने गए डालमियाः
डालमिया का रास्ता इसलिए भी साफ हो गया था, क्योंकि एक अन्य पूर्व अध्यक्ष शरद पवार को पूर्वी क्षेत्र से प्रस्तावक नहीं मिला। पूर्व क्षेत्र की सभी छह इकाइयां श्रीनिवासन गुट की समर्थक हैं। बीसीसीआइ सूत्रों ने कहा, 'इस बार पूर्वी क्षेत्र की बारी थी इसलिए डालमिया के पास पूर्व से प्रस्तावक और अनुमोदनकर्ता दोनों थे।' हालांकि पवार शनिवार को ही यहां पहुंच गए थे और उन्होंने अपने समर्थकों के साथ बैठक भी की। मजे की बात यह है कि दोनों गुट डालमिया को अपना उम्मीदवार बता रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के कारण श्रीनिवासन मजबूर होकर अध्यक्ष पद का चुनाव नहीं लड़ सके। वह चुनाव प्रक्रिया के दौरान केवल मतदान कर पाए। अदालत ने श्रीनिवासन की बीसीसीआइ अध्यक्ष और आइपीएल टीम मालिक के तौर पर हितों के टकराव की कड़ी आलोचना की थी।
