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| सीएम नीतीश कुमार |
बिहार की राजनीति में पिछले दिनों हुए घमासान के बाद भले ही अब यहां की राजनीतिक परिस्थितियां बदल गई है। लेकिन पूर्व मुख्यमंत्री जीतनराम मांझी द्वारा अपने कार्यकाल के अंतिम समय में लिए कई फैसलों को बदलना मौजूदा सीएम नीतीश कुमार के लिए किसी चुनौती से कम नहीं है। दरअसल, अपनी कुर्सी जाती देख मांझी ने कार्यकाल के अंतिम दिनों में कई बड़े फैसले लिए थे इनमें दलितों को जमीन देना, महादलितों को सुविधाएं बढ़ाना, पुलिसकर्मियों के वेतन संबंधित जैसे कई फैसले शामिल थे।
दलितों को अधिक जमीन -
2008 में नीतीश कुमार ने ढाई लाख महादलित परिवारों को तीन डेसीमल [1306 वर्ग फीट] भूमि दी जाएगी, जिनमें से 50 हजार को लाभ मिल चुका है। मांझी ने इसे बढ़ाकर पांच डेसीमल कर दिया। राज्य सरकार इस जमीन को मार्केट रेट से सरकार खरीद कर महादलितों को देगी। संशोधित निर्णय के लिए अतिरिक्त बजट की आवश्यकता होगी।
पासवान जैसे महादलित -
कार्यकाल के अंतिम समय के दौरान मांझी ने महादलितों के दलितों के साथ अंतर को कम किया तथा सुविधाएं बढ़ाने को कोशिश की। इस वोट बैंक के लिए रामविलास पासवान की धमकी के बाद मांझी के लिए इस निर्णय को वापस लेना भी नीतिश के लिए मुश्किल होगा।
शुल्क छूट -
मांझी ने दो माह पहले फैसला लिया था कि एससी व एसटी से संबंधित छात्राओं से स्नातक की पढ़ाई के दौरान कोई फीस नहीं ली जाएगी। महिला मतदाताओं के लिए यह योजना जाति विशेष के लिए देखी जा रही थी। नीतीश कुमार इस फैसले को रद करते हैं तो यह फैसला महादलितों को उनके खिलाफ कर सकता है।
महिला कोटा -
मांझी ने नीतीश के पूर्व के कार्यकाल के दौरान सरकारी नौकरी में मिलने वाले कोटे को 35 फीसद बढ़ा दिया। अगर नीतीश इस फैसले को वापस लेते हैं तो मांझी इसका फायदा उठाने की कोशिश करेंगे।
दलितों को अधिक जमीन -
2008 में नीतीश कुमार ने ढाई लाख महादलित परिवारों को तीन डेसीमल [1306 वर्ग फीट] भूमि दी जाएगी, जिनमें से 50 हजार को लाभ मिल चुका है। मांझी ने इसे बढ़ाकर पांच डेसीमल कर दिया। राज्य सरकार इस जमीन को मार्केट रेट से सरकार खरीद कर महादलितों को देगी। संशोधित निर्णय के लिए अतिरिक्त बजट की आवश्यकता होगी।
पासवान जैसे महादलित -
कार्यकाल के अंतिम समय के दौरान मांझी ने महादलितों के दलितों के साथ अंतर को कम किया तथा सुविधाएं बढ़ाने को कोशिश की। इस वोट बैंक के लिए रामविलास पासवान की धमकी के बाद मांझी के लिए इस निर्णय को वापस लेना भी नीतिश के लिए मुश्किल होगा।
शुल्क छूट -
मांझी ने दो माह पहले फैसला लिया था कि एससी व एसटी से संबंधित छात्राओं से स्नातक की पढ़ाई के दौरान कोई फीस नहीं ली जाएगी। महिला मतदाताओं के लिए यह योजना जाति विशेष के लिए देखी जा रही थी। नीतीश कुमार इस फैसले को रद करते हैं तो यह फैसला महादलितों को उनके खिलाफ कर सकता है।
महिला कोटा -
मांझी ने नीतीश के पूर्व के कार्यकाल के दौरान सरकारी नौकरी में मिलने वाले कोटे को 35 फीसद बढ़ा दिया। अगर नीतीश इस फैसले को वापस लेते हैं तो मांझी इसका फायदा उठाने की कोशिश करेंगे।
Source: Dainik Jagran Latest News in Hindi

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